₹10,000 से कम का 5G फोन… सुनने में ही अच्छा लगता है।
“5G भी मिल जाएगा, बजट भी नहीं टूटेगा” — यही लाइन सबसे पहले दिमाग में आती है।
लेकिन यहीं से confusion शुरू होता है।
क्योंकि सवाल यह नहीं है कि 5G मिल रहा है या नहीं, सवाल यह है कि
क्या ₹10,000 से कम का 5G फोन लेना वाकई सही फैसला है, या बस future-proofing के नाम पर आज का experience खराब करना है?
मैंने खुद ऐसे फोन इस्तेमाल किए हैं। सिर्फ review unit नहीं, रोज़मर्रा के काम में — UPI, YouTube, WhatsApp, Google Maps, cab apps, camera, hotspot… वही चीज़ें जो आप करते हैं।
और यहीं पर सच्चाई धीरे-धीरे सामने आती है।
असली confusion कहाँ अटकती है?

Indian buyer की सबसे बड़ी hesitation एक ही होती है:
“अब 5G आ गया है, तो 4G फोन लेकर गलती तो नहीं करूँगा?”
यह डर real है। कोई marketing gimmick नहीं।
लेकिन problem यह है कि ₹10,000 के नीचे जब कोई brand 5G देता है, तो कहीं न कहीं बहुत बड़ा compromise छुपा होता है।
वो compromise spec sheet में नहीं, रोज़ के use में दिखता है।
5G मिलेगा, लेकिन use कैसा होगा?
मान लेते हैं कि आपके शहर में 5G है।
Jio का signal आ भी रहा है, Airtel भी कभी-कभी पकड़ लेता है।
अब सवाल:
क्या आपका ₹9,999 वाला 5G फोन उस network को ठीक से handle कर पाएगा?
अक्सर जवाब होता है — partially।
- Phone गरम जल्दी होता है
- Data speed unstable रहती है
- Battery drain ज़्यादा होता है
- Background में apps जल्दी reload होते हैं
मतलब 5G technically “चल” रहा है, लेकिन मज़ा नहीं आ रहा।
और ये frustration धीरे-धीरे build होती है।
पहले महीने नहीं, तीसरे–चौथे महीने में।
Performance वाला सच, जो ads नहीं बताते
₹10,000 से कम के 5G फोन में जो processor आता है, वो ज़्यादातर entry-level 5G chipset होता है।
कागज़ पर ठीक लगता है, रोज़मर्रा में average से नीचे।
- Phone unlock करते ही कभी-कभी delay
- Camera open होने में सोचता है
- UPI payment के वक्त loading दिख जाती है
- 6–7 apps के बाद phone slow महसूस होने लगता है
यह सब एक दिन में नहीं, धीरे-धीरे।
और यही वो जगह है जहाँ regret शुरू होता है —
“काश थोड़ा 4G लेकर better phone लिया होता…”
Camera: सबसे बड़ा silent compromise
₹10,000 से कम के 5G फोन में camera numbers अच्छे दिखते हैं।
50MP, AI, night mode — सब लिखा होता है।
लेकिन असल जिंदगी में:
- Indoor photos soft निकलती हैं
- Skin tone गड़बड़
- Night photos में noise
- Video में focus hunt करता है
अगर आप camera-heavy user नहीं हैं, तो शायद चल जाएगा।
लेकिन Instagram, reels, family photos — यहाँ phone जल्दी expose हो जाता है।
Battery और charging: mixed bag

Battery capacity अक्सर ठीक मिल जाती है।
5000mAh अब normal है।
Problem battery size नहीं, optimization है।
5G + weak processor + average software =
दिन के अंत तक battery चिंता बनने लगती है।
Charging speed भी ज़्यादातर basic होती है।
कोई deal-breaker नहीं, लेकिन premium feel नहीं आता।
Offline market vs online reality
Online ₹9,999 में जो phone दिखता है, वही offline में ₹10,500–11,000 का हो जाता है।
Salesman बोलता है — “Sir, 5G है, future ready है।”
लेकिन वही salesman कभी यह नहीं बताएगा कि
₹9,000 का 4G phone रोज़ के काम में ज़्यादा smooth लग सकता है।
Small town buyers यहाँ सबसे ज़्यादा trap होते हैं।
5G word बड़ा लगता है, experience पीछे छूट जाता है।
Sale season psychology
Big Billion Days, Amazon sale —
“Only today”, “Last chance”, “5G under 10K”
यहीं सबसे ज़्यादा गलत फैसले होते हैं।
Sale में लोग पूछते नहीं —
“ये फोन 1 साल बाद कैसा चलेगा?”
बस देखते हैं —
“5G मिल रहा है, price कम है, ले लो।”
तो फिर ₹10,000 से कम का 5G फोन कब सही है?
साफ़-साफ़ बोलूँगा।
यह decision गलत नहीं है, लेकिन हर किसी के लिए नहीं है।
अगर आप:
- Light user हैं
- Phone सिर्फ calls, WhatsApp, YouTube के लिए चाहिए
- Performance से ज़्यादा “new tech” का satisfaction चाहिए
- 2 साल से ज़्यादा चलाने की उम्मीद नहीं रखते
तो हाँ, ₹10,000 से कम का 5G फोन चल सकता है।
लेकिन अगर आप:
- Phone रोज़ heavy use करते हैं
- Camera important है
- Smoothness notice करते हैं
- 3–4 साल चलाना चाहते हैं
तो honestly, यही जगह है जहाँ 4G बेहतर choice बन जाता है।
असली सवाल 5G बनाम 4G नहीं है
असल सवाल यह है:
क्या आप आज का experience sacrifice करके कल की guarantee खरीदना चाहते हैं?
5G future है, इसमें doubt नहीं।
लेकिन future तब meaningful है, जब present usable हो।
FAQs
Q1. क्या ₹10,000 के अंदर 5G फोन future-proof होता है?
Future-proof शब्द यहाँ थोड़ा heavy हो जाता है। Network future-ready हो सकता है, लेकिन phone की performance नहीं।
Q2. ₹10,000 से कम का 4G फोन लेना आज भी सही है?
अगर performance, camera और stability ज़्यादा matter करती है, तो हाँ।
Q3. Small town में 5G phone लेने का फायदा है?
अभी limited है। कई जगह 5G logo दिखता है, experience inconsistent रहता है।
Q4. Sale में 5G phone लेना safe है?
Price attractive होती है, लेकिन long-term सोच ज़रूरी है।
Q5. 5G battery ज़्यादा खाता है क्या?
Weak optimization वाले phones में हाँ, noticeable फर्क पड़ता है।
Final Verdict
₹10,000 से कम का 5G फोन लेना ना पूरी तरह सही है, ना पूरी तरह गलत।
यह फैसला तभी सही लगता है जब expectations सीमित हों।
अगर आप सिर्फ “5G होना चाहिए” सोचकर खरीद रहे हैं — तो रुकिए।
अगर आप जानते हैं कि compromise कहाँ हो रहा है — तब आगे बढ़िए।
सबसे खराब फैसला वो होता है, जो excitement में लिया जाए और 3 महीने बाद बोझ लगने लगे।
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